सुविधाएँ (Facilities)

शिक्षण एवं पाठ्यक्रम (Teaching & Study)
प्रयोगशालायें (Laboratories)
दृश्य श्रृव्य कक्ष (Audio –Video Visual Room)
विद्यालय पत्रिका (School Magazine)
शैक्षिक यात्रा – भारत दर्शन कार्यक्रम (Educational Tour “BHARAT DARSHAN”)
रंगमंचीय कार्यक्रम – वार्षिक स्नेह सम्मलेन (Annual Cultural Activities)
छात्र कल्याणकारी योजनाऍ , सुविधाएँ एवं क्रियाकलाप (Srudent’s Welfare Plan)
व्यक्तित्व विकास क्रियाकलाप व गतिविधियाँ (Activities of Personality Development)
आचार्य कल्याणकारी योजनाएँ (Teacher’s Welfare Plans)
Transportation Facilities

नमूनारूप शिशुवाटिका–विद्या भारती के सामान्य विद्यालयों में 3 वर्ष से अधिक आयु के भैया-बहिन अध्ययनरत हैं। इससे आगे बढ़ते हुए 0 से 5 वर्ष की शिक्षा (नवदम्पतियों को भावी संतति के लिए परामर्श केन्द्र) भी प्रान्त के तीन केन्द्रों पर अब प्रारम्भ किए है।
आदर्श विद्यालय दायित्व
(1) Academic Head शैक्षिक प्रमुख :-

– ऐसा व्यक्ति जो शैक्षिक क्षेत्र की जिम्मेदारी वहन करता है।
– एकेडमिक हेड का मुख्य कार्य विद्यालय में सशक्त शैक्षिक नेतृत्व करना है, उससे यह अपेक्षा भी की जाती है कि वह सम्वतः शारदार शैक्षणिक गतिविधियों से संस्था का उचित विकास करें। नेतृत्व विकास एवं प्रबंधन के बीच कड़ी का कार्य करें ।
– खुली दृष्टि के साथ अन्य आचार्यो के आन्तरिक दायित्व की निगरानी करें और व्यक्तिगत कुशलताओं को बढ़ाये।
– शैक्षिक पारदर्शी नेतृत्व एवं प्रबंधन ।
– शिक्षण एवं विद्यार्थी के लिये आवश्यक उत्तरदायित्व ।
– शिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाने हेतु शिक्षक, विद्यार्थी एवं विद्यालय के लिए शोध करना ।
– विद्यालय को ज्ञान संप्रेषण हेतु नये अवसर प्रदान करना ।
– समाज प्रबंधन की दृष्टि से शिक्षक एवं विद्यार्थी को तैयार करना ।
– वित्तीय प्रबंधन पर नियंत्रण रखना ।
– शैक्षिक विकास के क्षेत्र में नित नए नवाचार करना एवं कुशलताऐं बढ़ाना ।
– अध्ययन/अध्यापन के क्षेत्र में प्रक्रिया का विकास करना ।
– शिक्षण क्षेत्र में विद्यालय का नेतृत्व खड़ा करना ।
– विद्यालय के आन्तरिक विकास में संतुलन स्थापति करना ।
– आवश्यक सुधार हेतु प्राचार्य एवं एस.एम.सी. से युक्त संगत निर्णय कराकर क्रियान्वयन करना ।

(2) Counseller सलाहकार:-
-परामर्श प्राप्तकर्ता छात्र, शिक्षक, अभिभावक एवं अन्य हितचिंतक को सम्मान के साथ विश्वनीय संबंध बनाना ।
– धैर्य एवं संवेदना के साथ सहानुभूति का व्यवहार करना ।
– परामर्श प्राप्त कर्ता की बात को गंभीरता से सुनना और सुखद, संतोषप्रद एवं परिणामकारी सलाह देना ।
– परामर्श प्राप्तकर्ता को गहरी समझ हेतु सहयोग करना ।
– परामर्श प्राप्तकर्ता को क्या कहना चाहिए क्या करना चाहिए विशेष रुप से चुनौतियों पूर्ण परिस्थितियों में कैसा व्यवहार करना यह सिखाना चाहिए।
– स्व विकास हेतु उचित प्रशिक्षण की सलाह देना ।
– परामर्श प्राप्त कर्ता का प्रामाणिक मूल्यांकन कर उसे सुधार हेतु उचित सलाह देना ।
– परामर्श दाता की जानकारी और प्राप्तकर्ता की जानकारी अभिलेख के रुप में सुरक्षित रखना ।
– समय पर सलाह दूसरों के लिये उपयोगी बनें इस हेतु मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्र देना ।
-परामर्श प्राप्तकर्ता परीक्षा, नोकरी, व्यवसाय आदि में सफल हो सके इस हेतु उसे अवसाद की स्थिति से बाहर निकालना ।
– परिवार, समाज, विद्यालय एवं स्वयं परामर्श दाता के बीच मधुर संबंध का व्यवहार उत्पन्न करना ।

(3) PRO (Public Relation Officer) जनसम्पर्क अधिकारी :-

– जन सम्पर्क के माध्यम से एक मनुष्य दूसरे मनुष्य के बीच सम्पर्क सेतु का कार्य करता है ।
– वह अपने भाव विचार जानकारियों एवं ज्ञान का आदान-प्रदान करता है ।
-हम सामाजिक प्राणी है अतः जाने अनजाने हम सब जनसम्पर्क के दायरे में ।